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गुरुवार, 13 जुलाई 2017

Warning Of Scientists Signs Of The Six Epic Disaster // वैज्ञानिकों की चेतावनी, दिखने लगे छठे महाविनाश के संकेत


 धरती पर महाप्रलय की भविष्यवाणी की गई थी। ठीक वैसी ही भविष्यवाणी एक बार फिर से की गई है। बता दें कि इस बार जो धरती के विनाश की भविष्यवाणी हुई है उसमें करीब 30 फीसदी प्रजातियां खत्म हो जाएंगी।
सभी धर्मों के धार्मिक ग्रंथों में महाप्रलय या महाविनाश की परिकल्पना की गई है। विशेषकर हिंदू प्राचीन धर्म ग्रंथों में महाप्रलय बारे में विशेष उल्लेख से पता चलता है, इससे पहले भी महाविनाश हुए हैं जिसका अब वैज्ञानिक भी समर्थन कर रहे हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, लगभग साढ़े 4 अरब साल पुरानी इस धरती पर अब तक ऐसा 5 बार हुआ है जब सबसे ज्यादा फैली हुई प्रजातियां नष्ट हो गई हों। अब वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि उन्हें छठवें महाप्रलय के संकेत दिखने लगे हैं। पांचवीं बार के महाविनाश में डायनॉसोर तक का सफाया हो गया था और अब यह धरती छठे महाविनाश के दौर में प्रवेश कर चुकी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन पर रहने वाले सभी रीढ़धारी जंतु- स्तनधारी, पक्षी, रेंगनेवाले और उभयचर की प्रजातियों का 30 प्रतिशत हिस्सा विलुप्त हो चुका है। दुनिया के अधिकांश हिस्सों में स्तनधारी जानवर भौगोलिक क्षेत्र छिनने की वजह से अपनी जनसंख्या का 70 प्रतिशत हिस्सा खो चुके हैं।

चीता की संख्या घटकर सिर्फ 7 हजार रह गई है तो अफ्रीकी शेरों की संख्या भी साल 1993 से लेकर अब तक 43 प्रतिशत घट गई है। वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक बीते 100 सालों में 200 से ज्यादा प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। यह सिर्फ अकैडमिक रिचर्स के लिए मेक्सिको सिटी की यूनिवर्सिटी में रिसर्चर गेरार्दो सेबायोश का कहना है कि यह शोध फिलहाल अकैडमिक रिसर्च पेपर के लिए लिखा गया है। अभी इसपर कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा।

हजारों प्रजातियों की घट रही संख्या नेशनल अकैडमी ऑफ साइंसेज के एक नए शोध में यह खुलासा हुआ है कि धरती पर चिड़िया से लेकर जिराफ तक हजारों जानवरों की प्रजातियों की संख्या कम होती जा रही है। वैज्ञानिकों ने जानवरों की घटती संख्या को ‘वैश्विक महामारी' करार दिया है और इसे छठे महाविनाश का हिस्सा बताया है। बीते 5 महाविनाश प्राकृतिक घटना माने जाते रहे हैं लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक इस महाविनाश की वजह बड़ी संख्या में जानवरों के भौगोलिक क्षेत्र छिन जाने को बताया है।



The earthquake was predicted on Earth. The exact same prophecy has been made once again. Let us know that at this time about 30 percent of the species will be destroyed in the predicted destruction of the earth.
Mahaprala or Mahavinash is conceived in the religious texts of all religions. Especially in Hindu antiquity texts, there is a special mention about the Mahaprila, that even before Mahavinash has happened, now the scientists are also supporting.
According to the scientists, this is about 5 billion years ago on this earth that has been destroyed 5 times when the most extinct species have been destroyed. Now scientists have warned that they are showing signs of the sixth Maha Praalaya. The fifth dinosaur was destroyed in the Mahavinash of the fifth time and now the earth has entered into the sixth Mahavinash era.
According to the report, 30 percent of all spiders living on land, mammals, birds, creepers and amphibious species have become extinct. Mammalian animals have lost 70 percent of their population due to snatching the geographic area in most parts of the world.
The number of cheetahs has decreased to just 7 thousand, so the number of African lions has declined by 43 percent since 1993. According to scientists estimates, over 200 species have been extinct in the past 100 years. Researcher Gerardo Sebiol says that this research has just been written for academic research paper at the University of Mexico City for academic rehearsals. It will not be right to say anything on this now.
In a new research by the National Academy of Sciences, the number of thousands of species declining, it has been revealed that the number of species of thousands of animals is decreasing from birds to giraffe on Earth. Scientists have termed the declining number of animals as a "global pandemic" and described it as part of the sixth epic disaster. 5 Mahavinash has been considered as a natural phenomenon, but according to the scientists, due to this great disaster, a large number of animals have been told to snatch the geographic area.
                
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