शुक्रवार, 16 दिसंबर 2016

*क्षत्रियो के प्रति दुनिया का विचार* ===============


*1-मुगल अकबर की जुबान से :-* क्षत्रियो को हराना है तो उसे दोस्त बना लो क्योंकि दोस्ती/विश्वास के अलावा क्षत्रियो को जीतने या मारने का कोई तरीका नहीं हैं। { विजय नगर साम्राज्य से युद्ध के बाद }

*2- सिकंदर की जुबान से :-* क्षत्रिय  को केवल क्षत्रिय  ही मार या हरा सकता है या फिर भगवान। बाकी दुनिया केवल संघर्ष कर सकती है इनके आगे। {महाराज पोरस से युद्ध के बाद}

*3-मोहम्मद गौरी :-* अगर क्षत्रिय  से कोई चीज चाहिए तो माँग लो। धोखे से छीन लेने पर नामो निशान मिटा देता है !
{पृथ्वी राज से युद्ध की तैयारी के समय गुजरात के एक क्षत्रिय  राज परीवार के लिए, इस राज परिवार ने इसे युद्ध में सोलंकी के साथ मिल कर हराया और बाद में इसे रक्षण दिया }

*4-अंग्रेज :-* अगर क्षत्रिय  को जीतना हो तो इनको आपस में लड़वा दो पर स्वयं मध्यस्थ या एक पक्षकार भी ना बनो क्योंकि ये किस मत पर विभाजीत हों और किस पर एक हो जाएें कह पाना संम्भव नहीं |
{ क्षत्रिय  के विद्रोह के बाद }

*5- क्वीन विक्टोरीया :-* भारत में हमारा साम्राज्य केवल क्षत्रियो द्वारा ही कुचला जा सकता है, क्योंकि लालच और कमजोरी दोनों ही इनके नाम के प्रभाव से परे है। { द्वितीय विश्व युद्ध में राजपूत  रेजीमेंन्ट के विद्रोह करने पर }

*6- फ्रांसीसी :-* अगर युद्ध हाथों से हुआ करते तो ये दुनिया क्षत्रियो की गुलाम होती और तलवारों से भी और तीरों से भी पर शुक्र है कि हमने शासन करने के लिए बंन्दुकें और बारुद इजाद कर लिया है जिससे हम इन्हें जीतने से रोक सकते हैं कम से कम कुछ समय तक तो। {मैसुर युद्ध में टीपू की हार के बाद वहाँ के राजा वेडयार क्षत्रिय  अंग्रेजों के साथ मिल गया जिसने फ्रांसीसियों के विरुद्ध बाद में युद्ध किया }

*7- तैमुर लंग :-* भारत को लूटो, जितो, चाहे कुछ करो पर क्षत्रिय की तलवार के दायरे से बाहर और ब्राह्मणों के दायरे के अन्दर रह कर क्योंकि क्षत्रियो की तलवार पर केवल ब्राह्मणों की कुटिलता का ही प्रभाव चलता है। {अपने पूर्वजों द्वारा सोमनाथ लूटने के विवरण के दौरान कही बात को दोहराते हुए }

*इसीलिए इन बातों को ध्यान में रखते हुए आपस में ना झगड़े और सदैव एकता बनाये रखे..!!*

*जय क्षत्रिय  ••••••••जय श्रीराम।,*
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4 टिप्पणियाँ:

  1. बहोत ही अच्छी बाते बताई आपने
    सायद किसी राजपूत भाई की आँखे खुल जाए और उसे अपने धर्म और कर्तव्यों का बोध हो जाए

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