भागवत गीता का ऐसा गणित कि आप देखकर चकित रह जाएगे........

भागवत गीता जैसा ग्यान पूरे विश्व मे कही नही मिलता भागवत गीता को आप जितनी वार..................................

*क्षत्रियो के प्रति दुनिया का विचार===============

मुगल अकबर की जुबान से :-* क्षत्रियो को हराना है तो उसे दोस्त बना लो क्योंकि दोस्ती/विश्वास के अलावा क्षत्रियो को जीतने या मारने का कोई तरीका नहीं हैं। { विजय नगर साम्राज्य से युद्ध के बाद }

बुधवार, 19 अप्रैल 2017

जानिए श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुध्न के जन्म का समय, वार, तिथि, नक्षत्र


1— श्री राम जी का जन्म 10 जनवरी 5114 ईसा पूर्व दोपहर बारह बजे हुआ । यदि इसे आधुनिक कलेंडर में बदलें तो (चैत्र मास ,शुक्लपक्ष ,तिथि नवमी, पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न प्राप्त होता है ।) जिसे बाल्मीक जी ने अपनी रामायण में दर्शाया है।

मक्का मदीना से जुड़ा अनसुना रहस्य 

यह भी पढ़े – सीता की निंदा करने वाले धोबी के पूर्व जन्म का वृत्तान्त

2–श्री भरत जी का जन्म 11 जनवरी 5114 ईसा पूर्व सुबह चार बजे हुआ। (पुष्प नक्षत्र, मीन लग्न,)

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3–लक्ष्मण तथा शत्रुध्न का जन्म 11 जनवरी 5114 ईसा पूर्व ग्यारह बजकर तीस मिनट पे हुआ। ( अश्लेखा नक्षत्र, कर्क लग्न)

4–राम बडे थे भरत जी से 16 घन्टे ।

दांत दर्द से छुटकारा पाने के 5 आसान उपाय और गरेलु नुस्खे

5— राम बडे थे लखन और सत्रुघ्न से साढे तेइस घन्टे ।

6–भरत बडे थे लखन और सत्रुघ्न से साढे सात घन्टे ।
। जय श्री राम ।

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मंगलवार, 11 अप्रैल 2017

क्या आप जानते हैं हनुमान चालीसा की इस पंक्ति का रहस्य.....


सनातनी हिन्दू धर्म दुनिया का इकलौता ऐसा धर्म है जो धरती की शुरुवात से है उस वक़्त ये कोई धर्म नहीं था क्यूंकि जैसे अगर दुनिया में अगर कोई अकेला मनुष्य हो तो उसको नाम की जरुरत नहीं होगी वैसे सनातन धर्म को भी तब किसी नाम की जरुरत नहीं थी बाद में कुछ लोग सनातन ( पुराना ) कहने लगे कुछ आर्य कुछ भारतवंशी फिर जब दुनिया में कई धर्म उपजे..

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मक्का मदीना से जुड़ा अनसुना रहस्य 
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जैसे हिन्दू धर्म से उपजा बौद्ध धर्म ईसवी पूर्व 6वी सदी आज से तक़रीबन 2500 साल पहले

ईसाई धर्म पहली शताब्दी में आज से तक़रीबन 2000 साल पहले
 



इस्लाम धर्म सातवीं सदी में अरब में जन्मा आज से तक़रीबन 1400 साल पहले हुई जो हिन्दू धर्म और अखंड भारत के  लिए अभिशाप साबित हुआ जिसने सनातनी धर्म को और भारत को काफी आघात पहुँचाया उसी दौर में अपने को ख़तम होने से बचने के लिए हमारे धर्म को एक नाम मिला हिन्दू।
                                       
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हिन्दुइस्म के विषय पर मै राघव राजपूत  रिसर्च कर रहा हूँ उसपर भी मै एक ब्लॉग लिखूंगा कुछ दिन बाद.

                                    क्या आप जानते हैं हनुमान चालीसा की इस पंक्ति का रहस्य


                                                                 DOWNLOAD
आज हम बात करते है हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा के एक तथ्य के बारे में उन लोगो को जवाब देने के
लिए जो लोग हमारे धरम को अंधविश्वासी कहते है।



जुग सहस्र जौजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।
इस पंक्ति में धरती और सूर्य का बिलकुल सही  माप दिया गया है :-

युग - 12,000
सहस्र- 1,000
योजन - 8
इन सबको गुना करने पर मिलता है :-
9,60,00,000
यानि कि 9,60,00,000 मील
एक मील यानि 1.6 कि.मी
9,60,00,000 गुना यानि
15,36,00,000 कि.मी

विज्ञानको ने धरती से सूर्य की दुरी 18वी सदी में मालूम की जबकि तुलसीदास ने ये हनुमान चालीसा सदियों पहले
ही लिख दिया था।

                                    पाकिस्तान में स्थित एक ऐसा मंदिर यहाँ मुस्लिम भी झुकाते है सर


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दोस्तों ये है हमारा सनातन हिन्दू धरम कुछ लोग हमारे धर्म को अंधविश्वासी धरम कहते है पर वो हमारे धरम के
सही पहलुओं को नहीं जानते सनातन हिन्दू धर्म के ग्रंथो पौराणिक कथाओ और ऋषि मुनियो ने हज़ारो बर्ष पहले ही इस धरती के बाहर क्या है अंतरिक्ष के ग्रहो के वारे में और आज के युग के बारे में ग्रंथो किताबो में लिख दिया था जिसको विज्ञानं ने 18वी सदी के बाद खोजा वो हमारे ग्रंथो में हज़ारो वर्ष पहले से ही लिखा हुआ है। जब दुनिया
अपना वजूद तलाश रही थी अपना नाम तक नहीं जानती थी तब हमारे देश में ऋषि मुनि अनेक खोजे किया करते
थे।  दुनिया का सबसे बड़ा और पहला विश्वविद्यालय तक्षिला विश्वविद्यालय जहा पूरी दुनिया से लोग सिखने आते थे
हमारे ही ऋषि मुनियो की खोज है। आज के युग में हम अपने ग्रंथो पर खुद ही विश्वास नहीं करते और हमारे धर्म के बारे में जो अफबाहे उस काल में | फैलाई गयी थी जब हमारा देश अंग्रेजो से पहले 1००० बर्ष से मुस्लिमो का गुलाम था मुस्लिमो ने हमारे धर्म को तोड़ने के लिए कई गद्दार हिन्दुओ का सहारा ले कई मनगढंत कहानिया रची जिसमे ३३ करोड़ देवी देवता या ब्रह्मा का अपनी बेटी से सहवास  जैसी झूठी कहानियां जिनका कोई भी जीकर हमारे ग्रंथो में नहीं है पर आज हिन्दू खुद विश्वास करता है।

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अधूरा ज्ञान खतरना होता है।

33 करोड नहीँ  33 कोटी देवी देवता हैँ हिँदू
धर्म मेँ।

कोटि = प्रकार।
देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है,

कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता।

हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख

हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं...

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कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मे :-

12 प्रकार हैँ
आदित्य , धाता, मित, आर्यमा,
शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष,
सविता, तवास्था, और विष्णु...!

8 प्रकार हे :-
वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।

11 प्रकार है :-
रुद्र: ,हर,बहुरुप, त्रयँबक,
अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी,
रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।

एवँ
दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।

कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी

अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है

तो इस जानकारी को अधिक से अधिक                                                
लोगो तक पहुचाएं। ।

इस विषय में अगर मुझसे कोई त्रुटि हो गयी हो तो कृपया निचे कमेंट में बताएं और अपनी राय दें





 ज़यादा जानकारी के लिए ये वीडियो देखें
                                        क्या आप जानते हैं हनुमान चालीसा की इस पंक्ति का रहस्य


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रविवार, 9 अप्रैल 2017

कभी सोचा है की प्रभु श्री राम के दादा - परदादा का नाम क्या था? नहीं तो जानिये-

1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,                                

 दुनिया की सबसे भूतिया और रहस्मय जगह  
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2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए, 
                               
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 मक्का मदीना से जुड़ा अनसुना रहस्य

3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,        
            
15 रहस्यमयी ऐसे देश जो कभी थे भारत का हिस्सा      
                                    
4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,



5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |            

6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,

7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,        
               
मृत्यु से पहले ये 10 संकेत देता है भगवान

8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,      
                    
भारत का एक रहस्मयी टापू जहाँ नहीं चलता किसी का राज

9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,                 

10- अनरण्य से पृथु हुए,

                                                      मक्का मदीना से जुड़ा अनसुना रहस्य

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11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,

12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,         

 इन न्यूज़ हेडलाइन्स को पढ़ने के बाद शायद आप अपनी हंसी न रो पाएं

13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,         

14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,

15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,      

  क्या आपने किये कैलाश पर्वत पर भागवान शिव के दर्शन नहीं तो....

16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,

17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,                      

   Kya Aap Janto Ho Maa Vaishno Devi Ki Ye Katha

18- भरत के पुत्र असित हुए,

19- असित के पुत्र सगर हुए,

20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,

                                                दुनिया की सबसे भूतिया और रहस्मय जगह

                                        

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21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,

22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,

23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे |

24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |

25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,                     

  पाकिस्तान में स्थित एक ऐसा मंदिर यहाँ मुस्लिम भी झुकाते है सर |

26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,                     

27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए                        

  ध्यान न रखी जाएं ये 4 बातें तो व्यर्थ है आपका जप                  

28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,

29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,                                      

 महाभारत के प्राचीन शहर

30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,                                     

31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,

32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,     

 क्या आप जानते हैं हनुमान चालीसा की इस पंक्ति का रहस्य                 

33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,

34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,                          

35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,                 

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36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,

37- अज के पुत्र दशरथ हुए,

38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए |
इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी

(39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ | 

यहाँ के लोग शव को आधा जला बापिस ले जाते है घर    


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🏹रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य🏹
                                 
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1:~मानस में राम शब्द = 1443 बार आया है।

2:~मानस में सीता शब्द = 147 बार आया है।

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3:~मानस में जानकी शब्द = 69 बार आया है।

4:~मानस में बैदेही शब्द = 51 बार आया है।

5:~मानस में बड़भागी शब्द = 58 बार आया है।
                                                
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6:~मानस में कोटि शब्द = 125 बार आया है।

7:~मानस में एक बार शब्द = 18 बार आया है।

8:~मानस में मन्दिर शब्द = 35 बार आया है।
                                                    
9:~मानस में मरम शब्द = 40 बार आया है।

10:~लंका में राम जी = 111 दिन रहे।             

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11:~लंका में सीताजी = 435 दिन रहीं।

12:~मानस में श्लोक संख्या = 27 है।       

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13:~मानस में चोपाई संख्या = 4608 है।

14:~मानस में दोहा संख्या = 1074 है।   

  आखिर क्यों रो पड़े थे योगी संसद में वायरल विडियो |

15:~मानस में सोरठा संख्या = 207 है।

16:~मानस में छन्द संख्या = 86 है।         

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17:~सुग्रीव में बल था = 10000 हाथियों का।

18:~सीता रानी बनीं = 33वर्ष की उम्र में।

19:~मानस रचना के समय तुलसीदास की उम्र = 77 वर्ष थी।

 शिवरात्री के दिन शिवलिंग पर नाग ने की पूजा देखने के लिए

20:~पुष्पक विमान की चाल = 400 मील/घण्टा थी।

21:~रामादल व रावण दल का युद्ध = 87 दिन चला।

22:~राम रावण युद्ध = 32 दिन चला।               

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23:~सेतु निर्माण = 5 दिन में हुआ।

24:~नलनील के पिता = विश्वकर्मा जी हैं।

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25:~त्रिजटा के पिता = विभीषण हैं।              

26:~विश्वामित्र राम को ले गए =10 दिन के लिए।  

5 ऐसी वेबसाइट जिनके बारे में आपने पहले सुना नहीं होगा

27:~राम ने रावण को सबसे पहले मारा था = 6 वर्ष की उम्र में।

28:~रावण को जिन्दा किया = सुखेन बेद ने नाभि में अमृत रखकर।

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यह जानकारी  महीनों के परिश्रम केबाद आपके सम्मुख प्रस्तुत है ।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
  हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे

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शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

भाग-२ पृथ्वीराज चौहान मोहम्मद गोरी को 17 वार हराने वाले और माफ करने वाले पृथ्वीराज के साथ आखिर मे क्या हुआ था .चार भाष चौबीस गज अंगुल हस्त प्रमाण, त ऊपर सुल्तान है अब मत चुके चौहान"............


तराईन का दूसरा युद्ध (1192)
पृथ्वीराज चौहान द्वारा राजकुमारी संयोगिता का हरण करके इस प्रकार कन्नौज से ले जाना राजा जयचंद को बुरी तरह कचोट रहा था। उसके हृदय में अपमान के तीखे तीर से चुभ रहे थे। वह किसी भी कीमत पर पृथ्वीराज का विध्वंस चाहता था। भले ही उसे कुछ भी करना पड़े। विश्वसनीय सूत्रों से उसे पता चला कि मोहम्मद ग़ौरी पृथ्वीराज से अपनी पराजय का बदला लेना चाहता है। बस फिर क्या था जयचंद को मानो अपने मन की मुराद मिल गयी। उसने गौरी की सहायता करके पृथ्वीराज को समाप्त करने का मन बनाया। जयचंद अकेले पृथ्वीराज से युद्ध करने का साहस नहीं कर सकता था। उसने सोचा इस तरह पृथ्वीराज भी समाप्त हो जायेगा और दिल्ली का राज्य उसको पुरस्कार स्वरूप दे दिया जायेगा। राजा जयचंद की आँखों पर प्रतिशोध और स्वार्थ का ऐसा पर्दा पड़ा की वह अपने देश और जाति का स्वाभिमान भी त्याग बैठा था। राजा जयचंद के देशद्रोह का परिणाम यह हुआ की जो मुहम्मद गौरी तराइन के युद्ध में अपनी हार को भुला नहीं पाया था, वह फिर पृथ्वीराज का मुक़ाबला करने के षड़यंत्र करने लगा। राजा जयचंद ने दूत भेजकर गौरी को सैन्य सहायता देने का आश्वासन दिया। देशद्रोही जयचंद की सहायता पा कर गौरी तुरंत पृथ्वीराज से बदला लेने के लिए तैयार हो गया। जब पृथ्वीराज को ये सूचना मिली की गौरी एक बार फिर युद्ध की तैयारियों में जुटा हुआ तो उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। मुहम्मद गौरीकी सेना से मुकाबल करने के लिए पृथ्वीराज के मित्र और राज कवि चंदबरदाई ने अनेक राजपूत राजाओ से सैन्य सहायता का अनुरोध किया परन्तु संयोगिता के हरण के कारण बहुत से राजपूत राजा पृथ्वीराज के विरोधी बन चुके थे वे कन्नौज नरेश के संकेत पर गौरी के पक्ष में युद्ध करने के लिए तैयार हो गए। 1192 ई० में एक बार फिर पृथ्वीराज और गौरी की सेना तराइन के क्षेत्र में युद्ध के लिए आमने सामने खड़ी थी। दोनों और से भीषण युद्ध शुरू हो गया। इस युद्ध में पृथ्वीराज की और से 3 लाख सैनिकों ने भाग लिया था जबकि गौरी के पास एक लाख बीस हजार सैनिक थे। गौरी की सेना की विशेष बात ये थी की उसके पास शक्तिशाली घुड़सवार दस्ता था। पृथ्वीराज ने बड़ी ही आक्रामकता से गौरी की सेना पर आकर्मण किया। उस समय भारतीय सेना में हाथी के द्वारा सैन्य प्रयोग किया जाता था। गौरी के घुड़सवारो ने आगे बढकर राजपूत सेना के हाथियों को घेर लिया और उनपर बाण वर्षा शुरू कर दी। घायल हाथी न तो आगे बढ़ पाए और न पीछे बल्कि उन्होंने घबरा कर अपनी ही सेना को रोंदना शुरु कर दिया। तराइन के द्वितीय युद्ध की सबसे बड़ी त्रासदी यह थी की देशद्रोही जयचंद के संकेत पर राजपूत सैनिक अपने राजपूत भाइयों को मार रहे थे। दूसरा पृथ्वीराज की सेना रात के समय आक्रमण नहीं करती थी (यही नियम महाभारत के युद्ध में भी था) लेकिन तुर्क सैनिक रात को भी आक्रमण करके मारकाट मचा रहे थे। परिणाम स्वरूप इस युद्ध में पृथ्वीराज की हार हुई और उसको तथा राज कवि चंदबरदाई को बंदी बना लिया गया। देशद्रोही जयचंद का इससे भी बुरा हाल हुआ, उसको मार कर कन्नौज पर अधिकार कर लिया गया। पृथ्वीराज की हार से गौरी का दिल्ली, कन्नौज, अजमेर, पंजाब और सम्पूर्ण भारतवर्ष पर अधिकार हो गया। भारत में इस्लामी राज्य स्थापित हो गया। अपने योग्य सेनापतिकुतुबुद्दीन ऐबक को भारत का गवर्नर बना कर गौरी, पृथ्वीराज और चंदबरदाई को युद्ध बंदी के रूप में अपने गृह राज्य गौर की ओर रवाना हो गया !

मक्का मदीना से जुड़ा अनसुना रहस्य 
 
पृथ्वीराज चौहान के अंतिम समयः-
जयचंद की गद्दारी के कारन सम्राट पृथ्वीराज चौहान की सेना गौरी से हार चुकी थी ।पृथ्वीराज चौहान को बंदी बनाकर काबुल ले जाया गया ।
पृथ्वीराज का राजकवि चन्द बरदाई पृथ्वीराज से मिलने के लिए काबुल पहुंचा। वहां पर कैद खाने में पृथ्वीराज की दयनीय
हालत देखकर चंद्रवरदाई के हृदय को गहरा आघात लगा और उसने गौरी से बदला लेने की योजना बनाई।
चंद्रवरदाई ने गौरी को बताया कि हमारे राजा एक प्रतापी सम्राट हैं और इन्हें शब्दभेदी बाण (आवाज की दिशा में लक्ष्य को भेदनाद्ध चलाने
में पारंगत हैं, यदि आप चाहें तो इनके शब्दभेदी बाण से लोहे के सात तवे बेधने का प्रदर्शन आप स्वयं भी देख सकते हैं। इस पर गौरी
तैयार हो गया और उसके राज्य में सभी प्रमुख ओहदेदारों को इस
कार्यक्रम को देखने हेतु आमंत्रित किया।
पृथ्वीराज और चंद्रवरदाई ने पहले ही इस पूरे कार्यक्रम की गुप्त मंत्रणा कर ली थी कि उन्हें क्या करना है। निश्चित तिथि को दरबार लगा
और गौरी एक ऊंचे स्थान पर अपने मंत्रियों के साथ बैठ गया। चंद्रवरदाई के निर्देशानुसार लोहे के सात बड़े-बड़े तवे निश्चित
दिशा और दूरी पर लगवाए गए। चूँकि पृथ्वीराज की आँखे निकाल दी गई थी और वे अंधे थे, अतः उनको कैद एवं बेड़ियों से
आजाद कर बैठने के निश्चित स्थान पर लाया गया और उनके हाथों में धनुष बाण थमाया गया। इसके बाद चंद्रवरदाई ने
पृथ्वीराज के वीर गाथाओं का गुणगान करते हुए बिरूदावली गाई तथा गौरी के बैठने के स्थान को इस प्रकार चिन्हित कर
पृथ्वीराज को अवगत करवाया:-
‘‘चार भाष, चैबीस गज, अंगुल अष्ठ प्रमाण।
ता ऊपर सुल्तान है, चूके मत चौहान।।’’
अर्थात् चार बांस, चैबीस गज और आठ अंगुल जितनी दूरी के ऊपर
सुल्तान बैठा है, इसलिए चौहान चूकना नहीं, अपने लक्ष्य को
हासिल करो।
इस संदेश से पृथ्वीराज को गौरी की वास्तविक स्थिति का आंकलन हो गया। तब चंद्रवरदाई ने गौरी से कहा कि पृथ्वीराज
आपके बंदी हैं, इसलिए आप इन्हें आदेश दें, तब ही यह आपकी आज्ञा प्राप्त कर अपने शब्द भेदी बाण का प्रदर्शन करेंगे। इस पर
ज्यों ही गौरी ने पृथ्वीराज को प्रदर्शन की आज्ञा का आदेश दिया, पृथ्वीराज को गौरी की दिशा मालूम हो गई और
उन्होंने तुरन्त बिना एक पल की भी देरी किये अपने एक ही बाण से गौरी को मार गिराया।
गौरी उपर्युक्त कथित ऊंचाई से नीचे गिरा और उसके प्राण पंखेरू उड़ गए। चारों और भगदड़ और हा-हाकार मच गया, इस बीच पृथ्वीराज और चंद्रवरदाई ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार एक-दूसरे को कटार मार कर अपने प्राण त्याग दिये।
आज भी पृथ्वीराज चौहान और चंद्रवरदाई की समाधी काबुल में विद्यमान हैं।

पृथ्वीराज चौहान Part -1

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पृथ्वीराज चौहान मोहम्मद गोरी को 17 वार हराने वाले और माफ करने वाले पृथ्वीराज के साथ आखिर मे क्या हुआ था .चार भाष चौबीस गज अंगुल हस्त प्रमाण, त ऊपर सुल्तान है अब मत चुके चौहान"............


सम्राट श्री पृथ्वीराज चौहान
पूरा नाम:-चहुदीश आण चक्रवर्ती महान सम्राट श्री
पृथ्वीराज चौहान,
जन्म तिथि:-7 जुन 1148ईं
पुण्यतिथि:-15 मार्च 1206ईं
जन्म भूमि:-किला तारागढ, अजमेर, राजस्थान।
शासन काल:-1166ईं से 1192ईं तक,
राज्य:- राजस्थान,मध्य प्रदेश, दिल्ली और पंजाब के कई ईलाको तक शासन.  दिल्ली के अंतिम दिल्ली के अंतिम स्नातनी हिंदू शासक
राजधानी:-अजमेर और दिल्ली,
धार्मिक मन्यता:-सनातन धर्म,हिंदू
वंश:-क्षत्रियराजवंश चौहान
युद्ध:-तराइन ,और कई महत्वपूर्ण युद्ध
शासन अवधि:-27 वर्ष,
पिता:-महाराज सोमेश्वर राज चौहान,
माता:-कर्पूरी देवी,
पत्नी:-महारानी संयोगीता, इंदिरावती,शाशीव्रिता, इच्छनकुमारी,

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महत्वपूर्ण जानकारी पृथ्वीराज चौहान के बारे में:-
12वर्ष की आयु में घने जंगल में खुंखार शेर को बिना किसी
कि सहायता और हथियार के मारने वाला वीर बालक
पृथ्वीराज चौहान है।
13वर्ष कि आयु में पिता का साया सर से हठ गया बचपन में
पिता के मरने के बाद बहुत संघर्ष किया और अखंड
हिन्दुस्तान पर राजपूती प्रचम लहराने वाला वीर बालक
पृथ्वीराज चौहान है।
पिता कि मृत्यु के बदला लेने का और राजपाठ का त्याग
करने का प्रण लेने वाला वीर बालक पृथ्वीराज चौहान है।
15वर्ष की आयु में अजमेर और आस पास कि रियासतो को
संभालने वाला वीर बालक पृथ्वीराज चौहान है।
16वर्ष कि आयु मे दिल्ली के सिंहासन पर बैठने वाला वीर
बालक पृथ्वीराज चौहान है।
भगवान श्री कृष्ण के गीता ज्ञान को मानने वाला और
राम जी कि तरहा अपने माता पिता कि आज्ञा का
पालन करने वाला बालक पृथ्वीराज चौहान है।
अखंड हिन्दुस्तान में एकता, अखंडता, शांतिप्रिय,
न्यायप्रिय, दयालु, दानवीर और प्रजापालक वो सम्राट
पृथ्वीराज चौहान है।
हाथी आदिभयंकर पर बैठकर बड़े-बड़े सुरमाओ को मट्टी
मिलाने वाला और घोड़े नटरम्भा पर बैठकर वायु के वेग से
पलक झपकते दुश्मन के किले दिवारो को पार करने वाला
वो धरती का वीर योद्धा पृथ्वीराज चौहान है।
युद्ध कोशल और शुरवीरता के चर्चे सारे जग मे प्रसिद्ध थे
जिस कारण पृथ्वीराज चौहान को चक्रवर्ती सम्राट,
धरती का वीर योद्धा और राय पिथोरा कि
उपाधियो से सम्मानित किया गया है।
युद्ध की 12 कलाओ में और शब्द भेदी बाण चलाने में निपुर्ण थे पृथ्वीराज चौहान।

तराईन का पहला युद्ध (1191)...

मुहम्मद गोरी ने 1186 में गजनवी वंश के अंतिम शासक से लाहोर की गद्दी छीन ली और वह भारत के हिन्दू क्षेत्रों में प्रवेश की तैयारी करने लगा। 1191 में उन्हें पृथ्वी राज तूत्य के नेतृत्व में राजपूतों की मिलीजुली सेना ने जिसे कन्नौज और बनारस वर्तमान में वाराणसी के राजा जयचंद का भी समर्थन प्राप्त था। अपने साम्राज्य के विस्तार और सुव्यवस्था पर पृथ्वीराज चौहान की पैनी दृष्टि हमेशा जमी रहती थी। अब उनकी इच्छा पंजाब तक विस्तार करने की थी। किन्तु उस समय पंजाब पर मोहम्मद गौरी का राज था। 1190 ई० तक सम्पूर्ण पंजाब पर मुहम्मद गौरी का अधिकार हो चुका था। अब वह भटिंडा से अपना राजकाज चलता था। पृथ्वीराज यह बात भली भांति जानता था कि मोहम्मद ग़ौरी से युद्ध किये बिना पंजाब में चौहान साम्राज्य स्थापित करना असंभव था। यही विचार कर उसने गौरी से निपटने का निर्णय लिया। अपने इस निर्णय को मूर्त रूप देने के लिए पृथ्वीराज एक विशाल सेना लेकर पंजाब की और रवाना हो गया। तीव्र कार्यवाही करते हुए उसने हांसी, सरस्वती और सरहिंद के किलों पर अपना अधिकार कर लिया। इसी बीच उसे सूचना मिली कि अनहीलवाडा में विद्रोहियों ने उनके विरुद्ध विद्रोह कर दिया है। पंजाब से वह अनहीलवाडा की और चल पड़े। उनके पीठ पीछे गौरी ने आक्रमण करके सरहिंद के किले को पुन: अपने कब्जे में ले लिया। पृथ्वीराज ने शीघ्र ही अनहीलवाडा के विद्रोह को कुचल दिया। अब उसने गौरी से निर्णायक युद्ध करने का निर्णय लिया। उसने अपनी सेना को नए ढंग से सुसज्जित किया और युद्ध के लिए चल दिया। रावी नदी के तट पर पृथ्वीराज के सेनापति समर सिंह और गौरी की सेना में भयंकर युद्ध हुआ परन्तु कुछ परिणाम नहीं निकला। यह देख कर पृथ्वीराज गौरी को सबक सिखाने के लिए आगे बढ़ा। थानेश्वर से १४ मील दूर और सरहिंद के किले के पास तराइन नामक स्थान पर यह युद्ध लड़ा गया। तराइन के इस पहले युद्ध में राजपूतों ने गौरी की सेना के छक्के छुड़ा दिए। गौरी के सैनिक प्राण बचा कर भागने लगे। जो भाग गया उसके प्राण बच गए, किन्तु जो सामने आया उसे गाजर-मूली की तरह काट डाला गया। सुल्तान मुहम्मद गौरी युद्ध में बुरी तरह घायल हुआ। अपने ऊँचे तुर्की घोड़े से वह घायल अवस्था में गिरने ही वाला था की युद्ध कर रहे एक उसके सैनिक की दृष्टि उस पर पड़ी। उसने बड़ी फुर्ती के साथ सुल्तान के घोड़े की कमान संभाल ली और कूद कर गौरी के घोड़े पर चढ़ गया और घायल गौरी को युद्ध के मैदान से निकाल कर ले गया। नेतृत्वविहीन सुल्तान की सेना में खलबली मच चुकी थी। तुर्क सैनिक राजपूत सेना के सामने भाग खड़े हुए। पृथ्वीराज की सेना ने 80 मील तक इन भागते तुर्कों का पीछा किया। पर तुर्क सेना ने वापस आने की हिम्मत नहीं की। इस विजय से पृथ्वीराज चौहान को 7 करोड़ रुपये की धन सम्पदा प्राप्त हुई। इस धन सम्पदा को उसने अपने बहादुर सैनिको में बाँट दिया। इस विजय से सम्पूर्ण भारतवर्ष में पृथ्वीराज की धाक जम गयी और उनकी वीरता, धीरता और साहस की कहानी सुनाई जाने लगी।
be cont.........बाकी का भाग-२ मे...... Click   पृथ्वीराज चौहान Part -2


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शुक्रवार, 16 दिसंबर 2016

कया आप जानते है की मंदिर मे नंगे पैर जाना सूर्य पूजा करना तूलसी पूजा करना पिपल पूजा करना माथे पर तिलक लगाना सिर पर चोटी रखना ईन सब के कया कारन है और ईन सब के वारे मे विज्ञान क्या कहता है़ नही तो यह जरूर पढ़ें...........

      
1.*सिर पर चोटी*

हिंदू धर्म में ऋषि मुनी सिर पर चुटिया रखते थे। आज भी लोग रखते हैं।

वैज्ञानिक तर्क-

जिस जगह पर चुटिया रखी जाती है उस जगह पर दिमाग की सारी नसें आकर मिलती हैं। इससे दिमाग स्थ‍िर रहता है और इंसान को क्रोध नहीं आता, सोचने की क्षमता बढ़ती है।

दुनिया की सबसे भूतिया और रहस्मय जगह

2.*सूर्य नमस्कार*

हिंदुओं में सुबह उठकर सूर्य को जल चढ़ाते हुए नमस्कार करने की परम्परा है।

वैज्ञानिक तर्क-

पानी के बीच से आने वाली सूर्य की किरणें जब आंखों में पहुंचती हैं, तब हमारी आंखों की रौशनी अच्छी होती है।

भारत का एक रहस्मयी टापू जहाँ नहीं चलता किसी का राज 



3.*सिर पर चोटी*

हिंदू धर्म में ऋषि मुनी सिर पर चुटिया रखते थे। आज भी लोग रखते हैं।

वैज्ञानिक तर्क-

जिस जगह पर चुटिया रखी जाती है उस जगह पर दिमाग की सारी नसें आकर मिलती हैं। इससे दिमाग स्थ‍िर रहता है और इंसान को क्रोध नहीं आता, सोचने की क्षमता बढ़ती है।

                                  पाकिस्तान में स्थित एक ऐसा मंदिर यहाँ मुस्लिम भी झुकाते है सर

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4.*हाथ जोड़कर नमस्ते करना*

जब किसी से मिलते हैं तो हाथ जोड़कर नमस्ते अथवा नमस्कार करते हैं।

वैज्ञानिक तर्क-

जब सभी उंगलियों के शीर्ष एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और उन पर दबाव पड़ता है। एक्यूप्रेशर के कारण उसका सीधा असर हमारी आंखों, कानों और दिमाग पर होता है, ताकि सामने वाले व्यक्त‍ि को हम लंबे समय तक याद रख सकें। दूसरा तर्क यह कि हाथ मिलाने (पश्च‍िमी सभ्यता) के बजाये अगर आप नमस्ते करते हैं तो सामने वाले के शरीर के कीटाणु आप तक नहीं पहुंच सकते। अगर सामने वाले को स्वाइन फ्लू भी है तो भी वह वायरस आप तक नहीं पहुंचेगा।

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5.*जमीन पर बैठकर भोजन करना*

भारतीय संस्कृति के अनुसार जमीन पर बैठकर भोजन करना अच्छी बात होती है।
वैज्ञानिक तर्क-

पलती मारकर बैठना एक प्रकार का योग आसन है। इस पोजीशन में बैठने से मस्त‍िष्क शांत रहता है और भोजन करते वक्त अगर दिमाग शांत हो तो पाचन क्रिया अच्छी रहती है। इस पोजीशन में बैठते ही खुद-ब-खुद दिमाग से एक सिगनल पेट तक जाता है, कि वह भोजन के लिये तैयार हो जाये।

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6.*तुलसी के पेड़ की पूजा*

तुलसी की पूजा करने से घर में समृद्ध‍ि आती है। सुख शांति बनी रहती है।

वैज्ञानिक तर्क-

तुलसी इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है। लिहाजा अगर घर में पेड़ होगा, तो इसकी पत्त‍ियों का इस्तेमाल भी होगा और उससे बीमारियां दूर होती हैं।

 

7.*भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से*

जब भी कोई धार्मिक या पारिवारिक अनुष्ठान होता है तो भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से होता है।

वैज्ञानिक तर्क-

तीखा खाने से हमारे पेट के अंदर पाचन तत्व एवं अम्ल सक्रिय हो जाते हैं। इससे पाचन तंत्र ठीक तरह से संचालित होता है। अंत में मीठा खाने से अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है। इससे पेट में जलन नहीं होती है।



8.*पीपल की पूजा*

तमाम लोग सोचते हैं कि पीपल की पूजा करने से भूत-प्रेत दूर भागते हैं।

वैज्ञानिक तर्क-

इसकी पूजा इसलिये की जाती है, ताकि इस पेड़ के प्रति लोगों का सम्मान बढ़े और उसे काटें नहीं। पीपल एक मात्र ऐसा पेड़ है, जो रात में भी ऑक्सीजन प्रवाहित करता है.

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9.*एक गोत्र में शादी क्यूँ नहीं*

एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कहा की जेनेटिक बीमारी न हो इसका एक ही इलाज है और वो है "सेपरेशन ऑफ़ जींस".. मतलब अपने नजदीकी रिश्तेदारो में विवाह नही करना चाहिए ..क्योकि नजदीकी रिश्तेदारों में जींस सेपरेट (विभाजन) नही हो पाता और जींस लिंकेज्ड बीमारियाँ जैसे हिमोफिलिया, कलर ब्लाईंडनेस, और एल्बोनिज्म होने की १००% चांस होती है ..आखिर हिन्दूधर्म में हजारों सालों पहले जींस और डीएनए के बारे में कैसे लिखा गया है ? जो "विज्ञान पर आधारित" है !  हिंदुत्व में कुल सात गोत्र होते है और एक गोत्र के लोग आपस में शादी नही कर सकते ताकि जींस सेपरेट (विभाजित) रहे..

10.*दक्ष‍िण की तरफ सिर करके सोना*

दक्ष‍िण की तरफ कोई पैर करके सोता है, तो लोग कहते हैं कि बुरे सपने आयेंगे, भूत प्रेत का साया आ जायेगा, आदि। इसलिये उत्तर की ओर पैर करके सोयें।

वैज्ञानिक तर्क-

जब हम उत्तर की ओर सिर करके सोते हैं, तब हमारा शरीर पृथ्वी की चुंबकीय तरंगों की सीध में आ जाता है। शरीर में मौजूद आयरन यानी लोहा दिमाग की ओर संचारित होने लगता है। इससे अलजाइमर, परकिंसन, या दिमाग संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं रक्तचाप भी बढ़ जाता है।

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11.*माथे पर कुमकुम का तिलक*

महिलाएं एवं पुरुष माथे पर कुमकुम या तिलक लगाते हैं।

वैज्ञानिक तर्क-

आंखों के बीच में माथे तक एक नस जाती है। कुमकुम या तिलक लगाने से उस जगह की ऊर्जा बनी रहती है। माथे पर तिलक लगाते वक्त जब अंगूठे या उंगली से प्रेशर पड़ता है, तब चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशी सक्रिय हो जाती है। इससे चेहरे की कोश‍िकाओं तक अच्छी तरह रक्त पहुंचता है.

12.*कान छिदवाने की परम्परा*

भारत में लगभग सभी धर्मों में कान छिदवाने की परम्परा है।

वैज्ञानिक तर्क-

दर्शनशास्त्री मानते हैं कि इससे सोचने की शक्त‍ि बढ़ती है। जबकि डॉक्टरों का मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है और कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है।

13.*दीपक के ऊपर हाथ घुमाने का वैज्ञानिक कारण*

दीपक के ऊपर हाथ घुमाने का वैज्ञानिक कारण
आरती के बाद सभी लोग दिए पर या कपूर के ऊपर हाथ रखते हैं और उसके बाद सिर से लगाते हैं और आंखों पर स्पर्श करते हैं। ऐसा करने से हल्के गर्म हाथों से दृष्टि इंद्री सक्रिय हो जाती है और बेहतर महसूस होता है।



14.*मंदिर में घंटा लगाने का कारण*

मंदिर में घंटा लगाने का कारण
जब भी मंदिर में प्रवेश किया जाता है तो दरवाजे पर घंटा टंगा होता है जिसे बजाना होता है। मुख्य मंदिर (जहां भगवान की मूर्ति होती है) में भी प्रवेश करते समय घंटा या घंटी बजानी होती है, इसके पीछे कारण यह है कि इसे बजाने से निकलने वाली आवाज से सात सेकंड तक गूंज बनी रहती है जो शरीर के सात हीलिंग सेंटर्स को सक्रिय कर देती है।

15.*परिक्रमा करने के पीछे वैज्ञानिक कारण*

परिक्रमा करने के पीछे वैज्ञानिक कारण
हर मुख्य मंदिर में दर्शन करने और पूजा करने के बाद परिक्रमा करनी होती है। परिक्रमा 8 से 9 बार करनी होती है। जब मंदिर में परिक्रमा की जाती है तो सारी सकारात्मक ऊर्जा, शरीर में प्रवेश कर जाती है और मन को शांति मिलती है।

16.*चप्पल बाहर क्यों उतारते हैं ?*

चप्पल बाहर क्यों उतारते है ?
मंदिर में प्रवेश नंगे पैर ही करना पड़ता है, यह नियम दुनिया के हर हिंदू मंदिर में है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि मंदिर की फर्शों का निर्माण पुराने समय से अब तक इस प्रकार किया जाता है कि ये इलेक्ट्रिक और मैग्नैटिक तरंगों का सबसे बड़ा स्त्रोत होती हैं। जब इन पर नंगे पैर चला जाता है तो अधिकतम ऊर्जा पैरों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाती है।

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